11/05/2025
न मातुः परदैवतम्
माँ से बढ़कर कोई देव नहीं, माँ का स्थान देवता से भी ऊपर है। आप हर क्षण मेरे साथ हैं, आप मेरी हिम्मत हैं... प्रथम गुरु हैं, जिसने मुझे सतत् परिश्रम और प्रयत्न से असंभव को संभव में बदलना सिखाया...
आप सत्य, सेवा और समर्पण की स्वयंसिद्ध ईश्वरीय प्रेरणा हैं, जिससे मुझे जीवन में कर्म की दिशा और गति मिलती है।
आपके चरणों में बारंबार प्रणाम, नमन, वंदन करता हूं।