किसान समाचार

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24/07/2026

हरियाणा के सिरसा जिले के गांव गुड़िया खेड़ा में स्थित सिरसा जमींदारा एफपीसीएल कोल्ड स्टोरेज में शुक्रवार दोपहर भीषण आग लग गई। आग में कोल्ड स्टोरेज का शेड, उपकरण और 45 किलोवाट का सौर ऊर्जा सिस्टम जलकर राख हो गया। संचालक सतपाल खीचड़ ने बताया कि करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने करीब 1 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गनीमत यह रही कि कोल्ड स्टोरेज में फल नहीं रखे थे। ग्रामीणों और किसानों ने सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है।

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हरियाणा सरकार ने मछली पालकों को दी बड़ी राहत, पट्टे की राशि पर मिलेगी 40% सब्सिडीहरियाणा के मत्स्य पालन विभाग ने अनुसूचि...
12/07/2026

हरियाणा सरकार ने मछली पालकों को दी बड़ी राहत, पट्टे की राशि पर मिलेगी 40% सब्सिडी
हरियाणा के मत्स्य पालन विभाग ने अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से संबंधित पट्टेदारों को पंचायती तालाबों और सरकारी जलाशयों की लीज राशि पर सब्सिडी देने की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पहले साल की लीज राशि पर तो सहायता दी ही जाती है, साथ ही दूसरे से पांचवें वर्ष की लीज़ राशि पर भी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र का कहना है कि इस योजना से पट्टेदारों की कार्यक्षमता में विस्तार होगा और अतिरिक्त वित्तीय मदद मिलने से मत्स्य पालन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।

दूसरे से पांचवें वर्ष तक कितनी मिलेगी सब्सिडी?
हरियाणा मत्स्य पालन विभाग की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग के पट्टेदारों को दूसरे वर्ष से लेकर पांचवें वर्ष तक की लीज राशि पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत लाभार्थी को 40 प्रतिशत वास्तविक लीज राशि या 40,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, जो भी कम हो, अनुदान के रूप में दिया जाएगा। यह सब्सिडी अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही दी जाएगी। यह अनुदान केवल पंचायती तालाबों और सरकारी जलाशयों पर ही लागू होता है।

पहले साल की लीज राशि पर कितनी सहायता?
अनुसूचित जाति के मछली पालकों को पहले साल की लीज राशि पर 50 प्रतिशत या 50,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, जो भी कम हो, सब्सिडी दी जाती है। यह सहायता भी अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही सीमित है और केवल पंचायती तालाबों व सरकारी जलाशयों पर ही लागू होती है।

नदियों और नहरों के पट्टेदारों को क्या मिलेगा?
अधिसूचित जलक्षेत्रों, नदियों, नालों और नहरों की बोली के बाद सफल बोलीदाता-पट्टेदार को अधिकतम पांच लाख रुपए तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। यह उन पट्टेदारों के लिए एक बड़ी राहत है जो नदियों और नहरों में मछली पालन करते हैं।

योजना का लाभ लेने के लिए क्या शर्तें हैं?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें रखी गई हैं:

परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है

आवेदक हरियाणा राज्य का स्थाई निवासी होना चाहिए

आवेदक अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित होना चाहिए

आवेदक की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए

आवेदक किसी भी सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्था में कार्यरत नहीं होना चाहिए

अनुदान द्वितीय वर्ष से 5 वर्ष तक ही प्रदान किया जाएगा

अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही अनुदान दिया जाएगा

आवेदन के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को ये दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे:

मत्स्य पालक और विभाग के बीच हुए अनुबंध पत्र की प्रति

मत्स्य पालक और पंचायत के बीच हुए अनुबंध पत्र

जन्मतिथि और पहचान का प्रमाण पत्र

जाति प्रमाण पत्र

किसी सरकारी संस्थान से मत्स्य प्रशिक्षण से संबंधित प्रमाण पत्र

भूमि का रिकार्ड (पंचायत का प्रस्ताव दस्तावेज और पट्टा रसीद)

राजकीय/राष्ट्रीय मत्स्य बीज फार्म से मत्स्य बीज की खरीद की रसीद या वाउचर

तालाब से संबंधित फोटो

आवेदन कहाँ और कैसे करें?
इच्छुक लाभार्थी जिले के मत्स्य पालन विभाग के कार्यालय से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। विभाग की ओर से आवेदन के लिए सरल हरियाणा पोर्टल (saralharyana.gov.in) का भी उपयोग किया जा रहा है। आवेदक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति के मछली पालकों को रोजगार के अवसर प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार का मानना है कि लीज राशि पर सब्सिडी मिलने से पट्टेदारों की वित्तीय बोझ कम होगी और वे अपने व्यवसाय को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकेंगे। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र के अनुसार, यह योजना मत्स्य पालकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायक साबित हो सकती है।

मछली पालन के लिए और क्या सहायता मिलती है?
हरियाणा मत्स्य पालन विभाग मछली पालकों को कई अन्य प्रकार की वित्तीय और तकनीकी सहायता भी प्रदान करता है। इनमें गहन मत्स्य विकास योजना के तहत मछली बीज पर सब्सिडी, मछली पालन के लिए ऋण में सहायता, प्रशिक्षण और रिफ्रेशर कोर्स की व्यवस्था, तालाबों की मिट्टी और पानी की जांच, गुणवत्तापूर्ण बीज और चारे की आपूर्ति, मछली रोगों की जांच, फसल बीमा पर 50% सब्सिडी, तालाबों के नवीनीकरण पर सब्सिडी, सोलर सिस्टम पर 60% सब्सिडी और मछली पकड़ने के जाल की खरीद पर सब्सिडी शामिल हैं। मछली पालक इन सभी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय को बेहतर बना सकते हैं।

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हरियाणा सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आवंटित सरकारी आवासों में रहने वाले अपने कर्मचारियों के लिए रूफटॉप सोलर ऊर्जा प्र...
10/07/2026

हरियाणा सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आवंटित सरकारी आवासों में रहने वाले अपने कर्मचारियों के लिए रूफटॉप सोलर ऊर्जा प्रणाली को लेकर जरूरी निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और मुख्य प्रशासकों से कहा है कि संबंधित कर्मचारी 10 जुलाई 2026 तक अपना अंडरटेकिंग फॉर्म अनिवार्य रूप से जमा कर दें।

क्यों उठाया गया यह कदम? जानें पूरी वजह
यह कदम केंद्र सरकार की उस पहल के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी आवासीय भवनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देना और ज्यादा से ज्यादा भवनों पर इसकी स्थापना सुनिश्चित करना है। इस संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन की हाउस अलॉटमेंट कमेटी की ओर से भी निर्देश जारी किए गए हैं।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने चंडीगढ़ प्रशासन की हाउस अलॉटमेंट कमेटी के पत्र के बाद ये निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि चंडीगढ़ प्रशासन ने सोलर उपयोगकर्ता शुल्क (यूजर चार्जेज) के संबंध में कई सरकारी कर्मचारियों से प्रतिवेदन (representations) मिलने के बाद यह प्रक्रिया शुरू की है।

अंडरटेकिंग फॉर्म में कर्मचारियों को क्या बताना होगा?
सरकार की तरफ से दिए गए फॉर्म में कर्मचारियों को तीन विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से किसी एक को चुनना अनिवार्य है:

पहला विकल्प – कर्मचारी रूफटॉप सोलर संयंत्र से बनने वाली बिजली का उपयोग करना चाहता है और निर्धारित यूजर चार्ज का भुगतान करने को तैयार है। साथ ही उसे सोलर सिस्टम के रखरखाव के लिए अधिकृत कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश की अनुमति देनी होगी।

दूसरा विकल्प – कर्मचारी इस सुविधा का लाभ नहीं लेना चाहता। ऐसे में उसके आवास पर स्थापित सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली ग्रॉस मीटरिंग व्यवस्था के तहत बिजली वितरण लाइसेंसधारी को हस्तांतरित कर दी जाएगी।

तीसरा विकल्प – कर्मचारी यह बता सकता है कि यह व्यवस्था उन पर लागू नहीं होती।

अगर समय पर फॉर्म नहीं भरा तो क्या होगा?
हाउस अलॉटमेंट कमेटी ने साफ किया है कि यदि 10 जुलाई 2026 तक किसी कर्मचारी का अंडरटेकिंग फॉर्म प्राप्त नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि संबंधित कर्मचारी ने रूफटॉप सोलर ऊर्जा सुविधा के उपयोग के लिए अपनी सहमति नहीं दी है।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि पात्र कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने-अपने विभागाध्यक्षों के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में सहमति प्रपत्र जमा करें, ताकि उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए हाउस अलॉटमेंट कमेटी, चंडीगढ़ के कार्यालय को समय पर भेजा जा सके।

क्या है इस पहल का मकसद?
सरकार का मानना है कि इस पहल से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बिजली की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 2.2 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा है।

हरियाणा की सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना (SUPY) के तहत राज्य सरकार के कर्मचारियों, बोर्ड-निगमों के कर्मचारियों और HKRN कर्मियों को 5 किलोवाट तक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाने पर केंद्र सरकार की सब्सिडी के अलावा ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।

सभी पात्र कर्मचारी 10 जुलाई की समयसीमा से पहले अपना अंडरटेकिंग फॉर्म जमा कर दें – फॉर्म न भरने पर सोलर सुविधा से वंचित रह सकते हैं। फॉर्म भरते समय सही विकल्प चुनना न भूलें।

05/07/2026

नरमे की फसल में गुलाबी सुंडी का पक्के इलाज का दावा

फतेहाबाद। गांव भट्टूकलां में न्यू रेलवे फाटक के पास स्थित पंचायत जोहड़ पर अवैध कब्जे की शिकायत के बाद वीरवार को राजस्व व...
04/07/2026

फतेहाबाद। गांव भट्टूकलां में न्यू रेलवे फाटक के पास स्थित पंचायत जोहड़ पर अवैध कब्जे की शिकायत के बाद वीरवार को राजस्व विभाग ने मौके पर पैमाइश कर निशानदेही की। कार्रवाई के दौरान करीब 10 मकानों का कुछ हिस्सा जोहड़ की भूमि में पाया गया, जिससे मकान मालिकों में हलचल मच गई।

रोवर मशीन से की गई पैमाइश

कानूनगो हरी सिंह और पटवारी मुकेश ने सरपंच प्रहलाद सिंह की मौजूदगी में रोवर मशीन से जोहड़ की भूमि की पैमाइश की। जांच में सामने आया कि कुछ मकानों का निर्माण जोहड़ क्षेत्र में हुआ है। कानूनगो ने बताया कि ग्राम पंचायत जोहड़ का कुल रकबा 13 कनाल 10 मरले है।

समाधान शिविर में दर्ज कराई गई थी शिकायत

शिकायत भट्टूकलां निवासी संजय, सूरजभान और संतोष ने समाधान शिविर में दर्ज करवाई थी, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत जोहड़ की भूमि पर अवैध कब्जे से जल संरक्षण को खतरा पैदा हो गया था। लंबे समय से इस मामले को उठाने के बाद आखिरकार राजस्व विभाग ने संज्ञान लिया।

निशानदेही पूरी, रिपोर्ट तैयार

कानूनगो ने बताया कि निशानदेही पूरी कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरपंच प्रहलाद सिंह ने बताया कि निशानदेही प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और रिपोर्ट संबंधित विभाग को भेजी जाएगी।

कब्जाधारियों को जल्द मिलेगा नोटिस

सरपंच ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद कब्जाधारियों को नियमानुसार नोटिस जारी किए जाएंगे और सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जो भी मकान जोहड़ की भूमि पर अतिक्रमण करते पाए गए हैं, उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

ग्रामीणों के अनुसार, यह जोहड़ करीब दो साल से अतिक्रमण किया हुआ था। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब राजस्व विभाग की इस पैमाइश से ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि जल्द ही जोहड़ को अतिक्रमण मुक्त करवा दिया जाएगा।

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