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हरियाणा में खाद वितरण का नया सिस्टम, पहले ऐप से बुकिंग और फिर QR कोड से मिलेगी यूरियाचंडीगढ़। यूरिया और अन्य कृषि खादों ...
01/06/2026

हरियाणा में खाद वितरण का नया सिस्टम, पहले ऐप से बुकिंग और फिर QR कोड से मिलेगी यूरिया
चंडीगढ़। यूरिया और अन्य कृषि खादों की कालाबाजारी रोकने तथा किसानों को लंबी लाइनों से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक नई डिजिटल खाद वितरण प्रणाली (फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल) लागू करने जा रही है। इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा के यमुनानगर, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों में शुरू किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को खाद खरीदने के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से अग्रिम बुकिंग करनी होगी और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही उर्वरक का वितरण किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, किसानों को खाद प्राप्त करने से पहले अपने स्मार्टफोन पर मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जमीन और बोई जाने वाली फसल का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। जानकारी अपलोड होते ही सिस्टम द्वारा एक डिजिटल क्यूआर (QR) कोड आधारित टोकन जनरेट किया जाएगा। इस टोकन की मदद से किसान ऐप पर ही यह देख सकेंगे कि उनके आसपास की किस दुकान पर खाद का स्टॉक उपलब्ध है। इससे किसानों को खाद के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकने की आवश्यकता नहीं होगी और स्टॉक की रीयल-टाइम जानकारी पारदर्शी होगी। खाद विक्रेता के पास पहुंचने पर किसान के मोबाइल में मौजूद क्यूआर कोड को पीओएस (POS) मशीन से स्कैन किया जाएगा। इसके बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठे का निशान) प्रक्रिया पूरी होने पर ही खाद की तय मात्रा दी जाएगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' का मुख्य उद्देश्य यूरिया की तस्करी रोकना और वास्तविक किसानों तक सही समय पर खाद पहुंचाना है। योजना को धरातल पर उतारने से पहले प्रथम चरण में खाद कंपनियों और विक्रेताओं को नई प्रणाली का सघन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दुकानों पर पीओएस मशीनों की उपलब्धता और स्टॉक की ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। विक्रेताओं के बाद ग्रामीण स्तर पर विशेष अभियान चलाकर किसानों को भी इस डिजिटल प्रणाली के उपयोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा। तकनीकी बदलाव के कारण इस योजना में कुछ प्रारंभिक चुनौतियां भी संभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कम पढ़े-लिखे या बुजुर्ग किसानों को स्मार्टफोन और ऐप चलाने में कठिनाई आ सकती है। इसके अतिरिक्त, धान और गेहूं की बिजाई के पीक सीजन के दौरान एक साथ लाखों उपयोगकर्ताओं के ऐप पर आने से सर्वर डाउन होने की आशंका बनी रहेगी। खेतों में काम करने वाले कई किसानों के अंगूठों के निशान घिस जाने के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन में भी बाधा आ सकती है। इन तकनीकी समस्याओं के समाधान के रूप में कृषि विभाग ने तय किया है कि यदि क्यूआर कोड स्कैन नहीं होता है या अंगूठा मैच नहीं करता, तो किसान अपनी वोटर आईडी, आधार नंबर या एप्लिकेशन नंबर के जरिए भी प्रमाणीकरण कर खाद प्राप्त कर सकेंगे।

कृषि विभाग के उप निदेशक आदित्य प्रताप डबास के अनुसार, नई योजना को लेकर विभागीय स्तर पर बैठकों का दौर जारी है। उच्चाधिकारियों से विस्तृत दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) प्राप्त होते ही आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह नई और पारदर्शी व्यवस्था किसानों के लिए खाद प्राप्ति को पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित बनाएगी।

नई डिजिटल प्रणाली से खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया:

किसान को सबसे पहले विभागीय मोबाइल ऐप डाउनलोड कर अपना पंजीकरण करना होगा।

ऐप में अपनी कृषि भूमि का रकबा और बोई जाने वाली फसल का विवरण दर्ज करना होगा।

जानकारी सबमिट करते ही ऐप पर एक क्यूआर कोड (टोकन) और निकटतम खाद विक्रेता की लोकेशन दिखाई देगी।

खाद विक्रेता की दुकान पर जाकर यह क्यूआर कोड पीओएस मशीन में स्कैन करवाना होगा।

बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर सत्यापन पूरा होने के बाद खाद प्राप्त होगी।

फिंगरप्रिंट या स्कैनर में तकनीकी दिक्कत होने पर किसान आईडी या आधार नंबर बताकर भी खाद ले सकेंगे।

पौत्र होने की खुशी में किसान ने गौशाला को दान कर अपनी जमीनसिरसा। हरियाणा के सिरसा जिले के गांव खुईंया नेपालपुरा में एक क...
01/06/2026

पौत्र होने की खुशी में किसान ने गौशाला को दान कर अपनी जमीन

सिरसा। हरियाणा के सिरसा जिले के गांव खुईंया नेपालपुरा में एक किसान दर्शन सिंह ने पोता होने की खुशी में एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल करते हुए गांव की श्री कृष्ण प्रणामी गौशाला को अपनी 2 कनाल 4 मरला कृषि भूमि दान कर दी है। किसान ने बताया कि आज से 2 साल पहले मैं वह गौशाला में आया था और गौमाता के सामने हाथजोड़ कर कहा कि मुझे पोता हो जाए तो में ये अपनी जमीन गौशाला के नाम कर दूंगा। गौमाता के आशीर्वाद से मेरे घर में लड़का हुआ और पोते की खुशी में मैने अपनी जमीन गौशाला के नाम कर दी। समाज में जहां खुशी के मौकों पर लाखों रुपये दिखावे और भव्य आयोजनों पर खर्च किए जाते हैं, वहीं इस किसान ने इस दिखावे से उपर उठकर गौ सेवा का मार्ग चुना है। ग्रामीण क्षेत्र में हुए इस भूमि दान ने पूरे प्रदेश के सामने सामाजिक सरोकार की एक बड़ी मिसाल पेश की है। गांव के सरपंच प्रतिनिधि राधेश्याम गांधी व स्थानीय ग्रामीणों और गौशाला प्रबंधन समिति ने किसान के इस निस्वार्थ फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है और गौशाला में उनका धन्यवाद करते हुए सम्मानित किया। समिति के सदस्यों का कहना है कि वर्तमान समय में गौशालाओं को चारे और स्थान की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में 2 कनाल 4 मरला भूमि मिलने से गौशाला की चारे की समस्या का काफी हद तक स्थायी समाधान हो सकेगा।

सिरसा के भंबूर गांव में कृषि यूरिया की कालाबाजारी का बड़ा खेल उजागरसिरसा। भारतीय किसान एकता (बीकेई टीम) ने सूचना के आधार...
31/05/2026

सिरसा के भंबूर गांव में कृषि यूरिया की कालाबाजारी का बड़ा खेल उजागर

सिरसा। भारतीय किसान एकता (बीकेई टीम) ने सूचना के आधार पर एग्रीकल्चर ग्रेड की यूरिया खाद गट्टों में बदलकर टेक्निकल ग्रेड में बेचने वाले लोगों को रंगे हाथों पकड़ा है। टीम ने इस संबंधी विभाग की टीम को भी सूचित किया, ताकि आरोपियों पर कार्रवाई की जा सके। बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने बताया कि गुप्त सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई की यूरिया खाद की कालाबाजारी हो रही है। खेती में प्रयोग होने वाली यूरिया खाद जोकि 45 किलो के गट्टे किसानों को सब्सिडी पर दिए जाते हैं, उन्हें हिमांशु उर्फ मासूम पुत्र पवन गर्ग तथा उसके साथियों द्वारा गलत तरीके से भंबूर गांव के पास भैंसों के नोहरे में 50 किलो के सफेद गट्टों में भरकर उन पर टेक्निकल ग्रेड का मार्का लगाकर राजस्थान नंबर के बड़े कंटेनर (आरजे 18जीबी 7384) गाड़ी में लोड किया जा रहा है। सूचना के आधार पर वे स्वयं, बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली तथा राज्य कार्यकारिणी सदस्य गुरपिंदर सिंह काहलों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि सफेद गट्टों में यूरिया खाद गाड़ी में लोड हो रही है। अंग्रेज सिंह ने तुरंत उप कृषि निदेशक सुखदेव सिंह को शिकायत की कि सफेद गट्टों में अवैध रूप से यूरिया खाद कंटेनर में लोड की जा रही है तथा मौके पर 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस को भी बुला लिया गया। शिकायत के बाद मौके पर आईपीएस अधिकारी शिवम, एस आई सत्यवान, गुण नियंत्रण निरीक्षक अमित कुमार, विषय विशेषज्ञ राकेश कुंट, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी विजेंद्र चौहान, जीएसटी विभाग से ईटीओ सुरेंद्र गोदारा पहुंच गए, जिन्होंने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से 50 किलो के गट्टों में भरी गई यूरिया खाद को अपने कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। औलख ने कहा कि कई दिनों से यूरिया खाद अवैध रूप से बाहरी राज्यों की फैक्ट्रीयों में ब्लैक में बेची जाने की सूचनाएं मिल रही थी। यह यूरिया खाद 45 किलो की पैकिंग में 266.50 रुपए एमआरपी कृभको कंपनी की मई 2026 की बनी हुई थी, जो की गट्टे पलटकर 50 किलो के गट्टों में भरकर टेक्निकल ग्रेड का मार्का गाकर राजस्थान के कोटा में भेजी जा रही थी। यह सतनाम ट्रेडर्स, कांडा कॉलोनी, रानिया रोड सिरसा द्वारा फर्जी बिल न. एसटी-07 दिनांक 30 जून 2026 तथा ई ई-वे बिल नंबर 3522 6186 8360 के माध्यम से चौहान इनोवेशन सरस्वती एनक्लेव कंसुआ, कोटा राजस्थान में भेजी जा रही थी। एग्रीकल्चर ग्रेड की यूरिया पर 5 प्रतिशत जीएसटी है, जबकि टेक्निकल ग्रेड की यूरिया पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। किसानों का हक छीनने वाले लुटेरों द्वारा धोखाधड़ी के साथ-साथ फर्जी जीएसटी स्कैन भी किया जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन तथा हरियाणा सरकार से आह्वान किया कि इस खेल के पीछे छुपे सभी लुटेरों का पदार्फाश किया जाए तथा उन पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसान को यूरिया खाद मिल सके। संयुक्त टीम द्वारा यूरिया खाद के कंटेनर को सदर थाना में आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है।

मुर्रा भैंस और देसी गाय पर मिलेंगे 40 हजार रुपये
30/05/2026

मुर्रा भैंस और देसी गाय पर मिलेंगे 40 हजार रुपये

मुर्रा भैंस और देसी गाय पर मिलेंगे 40 हजार रुपये

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में स्वदेशी गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और उच्च दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 'स्वदेशी गौवंश संरक्षण एवं विकास (गोसंवर्धन) तथा एकीकृत मुर्राह विकास योजना' लागू की है। इस योजना के तहत राज्य के पशुपालकों को उनकी उच्च दुग्ध उत्पादन वाली देसी गायों (हरयाना, साहीवाल और बेलाही) तथा मुर्राह नस्ल की भैंसों पर अधिकतम 40 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी नस्लों की संख्या में वृद्धि करना, पशुपालकों की आय बढ़ाना और डेयरी क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना के वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन का रिकॉर्ड तैयार कर मानकों के आधार पर प्रोत्साहन राशि तय की गई है। मुर्राह नस्ल की भैंस पालकों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। 18 से 22 किलोग्राम दूध उत्पादन पर 20 हजार रुपये, 22 से 25 किलोग्राम पर 30 हजार रुपये तथा 25 किलोग्राम से अधिक उत्पादन पर 40 हजार रुपये दिए जाएंगे। साहीवाल नस्ल की गाय के लिए 10 से 12 किलोग्राम दूध पर 15 हजार, 12 से 15 किलोग्राम पर 20 हजार और 15 किलोग्राम से अधिक पर 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि तय की गई है। हरयाना नस्ल की गायों के मामले में 8 से 10 किलोग्राम दुग्ध उत्पादन पर 15 हजार, 10 से 12 किलोग्राम पर 20 हजार और 12 किलोग्राम से अधिक दुग्ध उत्पादन पर 25 हजार रुपये मिलेंगे। बेलाही नस्ल की गाय पालने वालों को 5 से 8 किलोग्राम उत्पादन पर 5 हजार, 8 से 10 किलोग्राम पर 10 हजार और 10 किलोग्राम से अधिक दूध देने पर 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि दूध की रिकॉर्डिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

सघन पशुधन विकास परियोजना के उपनिदेशक डॉ. सुखविंद्र सिंह के अनुसार, इस योजना का लाभ केवल हरियाणा के स्थायी निवासी पशुपालक ही ले सकेंगे, जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है। योजना व्यक्तिगत लाभार्थियों तक सीमित है; किसी समूह, फर्म या संस्था को इसका लाभ नहीं मिलेगा। एक पात्र आवेदक अधिकतम चार दुधारू पशुओं पर अनुदान ले सकता है और किसी एक पशु पर उसके पूरे जीवनकाल में अधिकतम तीन बार ही प्रोत्साहन राशि प्राप्त की जा सकती है।

लाभार्थियों के लिए पशुपालन विभाग ने कुछ नियम भी निर्धारित किए हैं। चयनित पंजीकृत देसी गाय या मुर्राह भैंस और उसकी नर संतान को कम से कम एक वर्ष तक बेचना प्रतिबंधित होगा। बछड़ों और कटड़ों की उचित देखभाल करना अनिवार्य है। विभाग को आवश्यकता पड़ने पर इन पशुओं को खरीदने का प्रथम अधिकार प्राप्त होगा। इसके साथ ही, नस्ल सुधार और गुणवत्तापूर्ण पशुधन को बढ़ावा देने के लिए पंजीकृत पशुओं का प्रजनन कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) के माध्यम से करवाना अनिवार्य किया गया है। निर्धारित शर्तों का पालन न करने वाले पशुपालक योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे।

योजना के लिए आवेदन व भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया:

पशुपालकों को योजना का लाभ लेने के लिए हरियाणा सरकार के 'सरल अंत्योदय पोर्टल' (Saral Haryana) या नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

आवेदन के समय परिवार पहचान पत्र (PPP), आवेदक का पैन कार्ड और बैंक पासबुक या रद्द किए गए चेक की कॉपी अपलोड करना अनिवार्य है।

पोर्टल पर आवेदन स्वीकृत होने के बाद, पशुपालन विभाग के स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा पशु का भौतिक सत्यापन और तय समय तक दूध की रिकॉर्डिंग (Milk Recording) की जाएगी।

दूध उत्पादन का मानक सही पाए जाने पर विभाग द्वारा प्रोत्साहन राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

चंडीगढ़। हरियाणा के गांवों में लाल डोरा और स्वामित्व योजना की जमीन को लेकर चल रहे विवादों में उलझे लोगों के लिए सरकार ने...
29/05/2026

चंडीगढ़। हरियाणा के गांवों में लाल डोरा और स्वामित्व योजना की जमीन को लेकर चल रहे विवादों में उलझे लोगों के लिए सरकार ने एक बहुत बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब गांव के लोगों को अपनी जमीन से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए बीडीपीओ (BDPO) और डीडीपीओ (DDPO) दफ्तरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे।

सरकार ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि लाल डोरा के अंदर आने वाली आबादी देह की जमीन से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई और निपटारा अब सीधे तहसीलदार और नायब तहसीलदार ही करेंगे। इस फैसले से फाइलों के दफ्तरों में अटकने का झंझट खत्म हो जाएगा और लोगों को अपनी पुश्तैनी जमीन का मालिकाना हक जल्दी मिल सकेगा।

विकास एवं पंचायत विभाग की तरफ से प्रदेश के सभी उपायुक्तों (DC) को इस संबंध में पक्के आदेश जारी कर दिए गए हैं। दरअसल, सरकार के संज्ञान में यह बात आई थी कि लाल डोरा और स्वामित्व योजना से जुड़ी शिकायतें बेवजह ब्लॉक और जिला पंचायत विकास अधिकारियों (बीडीपीओ व डीडीपीओ) के पास भेजी जा रही थीं। इन अधिकारियों के पास इस तरह के विवाद सुलझाने की कोई कानूनी पावर (अधिकार) ही नहीं है, जिसके चलते शिकायतें महीनों तक फाइलों में धूल फांकती रहती थीं और लोगों को न्याय के लिए इंतजार करना पड़ता था।

इस पूरी परेशानी को खत्म करने के लिए सरकार ने 'हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितकरण, अभिलेखीकरण एवं समाधान) अधिनियम-2025' के नियमों को सख्ती से लागू कर दिया है। यह कानून वैसे तो 19 जनवरी 2026 को अधिसूचित हुआ था, लेकिन इसे 26 नवंबर 2025 से ही लागू माना गया है।

नए निर्देशों में साफ कर दिया गया है कि लाल डोरा विवादों में अब केवल अधिकृत राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) ही फैसला ले सकेंगे। इस अधिनियम की धारा 15 और 16 के तहत अब सिर्फ नायब तहसीलदार (एसी द्वितीय श्रेणी) और तहसीलदार (एसी प्रथम श्रेणी) को ही इन शिकायतों को सुनने और उनका पक्का समाधान करने का अधिकार दिया गया है।

जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल ने सरकार के इस कदम की जानकारी देते हुए बताया कि अब पंचायत विभाग के अधिकारियों के पास ऐसी कोई फाइल नहीं भेजी जाएगी। लोग सीधे अपने इलाके के राजस्व अधिकारियों के पास जा सकेंगे। सरकार के इस कदम से काम में पूरी पारदर्शिता आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन को लेकर होने वाले आपसी झगड़े जल्दी खत्म होंगे।

लाल डोरा जमीन विवाद की शिकायत अब कैसे करें (नया तरीका):

अपनी लाल डोरा जमीन या स्वामित्व योजना से जुड़ी शिकायत की एक फाइल तैयार करें, जिसमें जमीन के पुराने सबूत या कागजात लगा लें।

अब इस फाइल को लेकर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) या डीडीपीओ (DDPO) कार्यालय में बिल्कुल न जाएं।

अपनी शिकायत को सीधे अपने तहसील कार्यालय में जाकर संबंधित नायब तहसीलदार या तहसीलदार के पास जमा करवाएं।

राजस्व अधिकारी नए कानून की धारा 15 और 16 के तहत आपके मामले की सुनवाई करेंगे और कानूनी रूप से उसका पक्का निपटारा करेंगे।

हरियाणा में लाल डोरा विवाद निपटारा के बदले नियम, जाने अब कहां करें शिकायत

चंडीगढ़। हरियाणा के गांवों में लाल डोरा और स्वामित्व योजना की जमीन को लेकर चल रहे विवादों में उलझे लोगों के लिए सरकार ने एक बहुत बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब गांव के लोगों को अपनी जमीन से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए बीडीपीओ (BDPO) और डीडीपीओ (DDPO) दफ्तरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे।

सरकार ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि लाल डोरा के अंदर आने वाली आबादी देह की जमीन से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई और निपटारा अब सीधे तहसीलदार और नायब तहसीलदार ही करेंगे। इस फैसले से फाइलों के दफ्तरों में अटकने का झंझट खत्म हो जाएगा और लोगों को अपनी पुश्तैनी जमीन का मालिकाना हक जल्दी मिल सकेगा।

विकास एवं पंचायत विभाग की तरफ से प्रदेश के सभी उपायुक्तों (DC) को इस संबंध में पक्के आदेश जारी कर दिए गए हैं। दरअसल, सरकार के संज्ञान में यह बात आई थी कि लाल डोरा और स्वामित्व योजना से जुड़ी शिकायतें बेवजह ब्लॉक और जिला पंचायत विकास अधिकारियों (बीडीपीओ व डीडीपीओ) के पास भेजी जा रही थीं। इन अधिकारियों के पास इस तरह के विवाद सुलझाने की कोई कानूनी पावर (अधिकार) ही नहीं है, जिसके चलते शिकायतें महीनों तक फाइलों में धूल फांकती रहती थीं और लोगों को न्याय के लिए इंतजार करना पड़ता था।

इस पूरी परेशानी को खत्म करने के लिए सरकार ने 'हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितकरण, अभिलेखीकरण एवं समाधान) अधिनियम-2025' के नियमों को सख्ती से लागू कर दिया है। यह कानून वैसे तो 19 जनवरी 2026 को अधिसूचित हुआ था, लेकिन इसे 26 नवंबर 2025 से ही लागू माना गया है।

नए निर्देशों में साफ कर दिया गया है कि लाल डोरा विवादों में अब केवल अधिकृत राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) ही फैसला ले सकेंगे। इस अधिनियम की धारा 15 और 16 के तहत अब सिर्फ नायब तहसीलदार (एसी द्वितीय श्रेणी) और तहसीलदार (एसी प्रथम श्रेणी) को ही इन शिकायतों को सुनने और उनका पक्का समाधान करने का अधिकार दिया गया है।

जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल ने सरकार के इस कदम की जानकारी देते हुए बताया कि अब पंचायत विभाग के अधिकारियों के पास ऐसी कोई फाइल नहीं भेजी जाएगी। लोग सीधे अपने इलाके के राजस्व अधिकारियों के पास जा सकेंगे। सरकार के इस कदम से काम में पूरी पारदर्शिता आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन को लेकर होने वाले आपसी झगड़े जल्दी खत्म होंगे।

लाल डोरा जमीन विवाद की शिकायत अब कैसे करें (नया तरीका):

अपनी लाल डोरा जमीन या स्वामित्व योजना से जुड़ी शिकायत की एक फाइल तैयार करें, जिसमें जमीन के पुराने सबूत या कागजात लगा लें।

अब इस फाइल को लेकर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) या डीडीपीओ (DDPO) कार्यालय में बिल्कुल न जाएं।

अपनी शिकायत को सीधे अपने तहसील कार्यालय में जाकर संबंधित नायब तहसीलदार या तहसीलदार के पास जमा करवाएं।

राजस्व अधिकारी नए कानून की धारा 15 और 16 के तहत आपके मामले की सुनवाई करेंगे और कानूनी रूप से उसका पक्का निपटारा करेंगे।

हरियाणा में किसानों को आधे रेट में मिल रहे ये 15 खेती यंत्रकृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए क...
28/05/2026

हरियाणा में किसानों को आधे रेट में मिल रहे ये 15 खेती यंत्र
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है। अनुदान प्राप्त करने के लिए पात्र किसान 15 जून तक विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह योजना वर्ष 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) घटक के अंतर्गत लागू की गई है।

सहायक कृषि अभियंता विजय कुमार ने बताया कि व्यक्तिगत श्रेणी के तहत किसानों को सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, सुपर सीडर, सरफेस सीडर, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, श्रेडर, मल्चर, श्रबमास्टर, रोटरी स्लेशर, हाईड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लॉव, जीरो टिल सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, बेलिंग मशीन (बेलर व स्ट्रा रेक), स्वचालित क्रॉप रिपर, ट्रैक्टर चालित क्रॉप रिपर, ट्रैक्टर चालित लोडर तथा टेडर मशीन जैसे कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इच्छुक किसान विभाग की वेबसाइट एग्रीहरियाणाडॉटजीओवीडॉटइन पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। जिन किसानों के फार्म रिकॉर्ड में पिछले दो सीजन के दौरान फसल अवशेष जलाने के कारण रेड एंट्री दर्ज है, वे तथा उनकी फैमिली आईडी से जुड़े अन्य सदस्य इस योजना का लाभ लेने के पात्र नहीं होंगे।

सामान्य वर्ग के किसानों के लिए शर्त है कि पिछले तीन वर्षों में उनकी पीपीपी आईडी के किसी सदस्य ने इन कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ न लिया हो। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए यह शर्त लागू होगी कि जिस कृषि यंत्र के लिए आवेदन किया जा रहा है, उस पर पहले कोई अनुदान प्राप्त न किया गया हो।

उन्होंने बताया कि किसानों का “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर खरीफ व रबी 2025-26 के लिए पंजीकृत होना अनिवार्य है। प्रत्येक किसान केवल एक कृषि यंत्र के लिए ही आवेदन कर सकता है। अधिक जानकारी के लिए किसान कार्यालय सहायक कृषि अभियंता, सिरसा में किसी भी कार्य दिवस पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।

हरियाणा में किसानों को आधे रेट में मिल रहे ये 15 खेती यंत्र

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है। अनुदान प्राप्त करने के लिए पात्र किसान 15 जून तक विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह योजना वर्ष 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) घटक के अंतर्गत लागू की गई है।

सहायक कृषि अभियंता विजय कुमार ने बताया कि व्यक्तिगत श्रेणी के तहत किसानों को सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, सुपर सीडर, सरफेस सीडर, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, श्रेडर, मल्चर, श्रबमास्टर, रोटरी स्लेशर, हाईड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लॉव, जीरो टिल सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, बेलिंग मशीन (बेलर व स्ट्रा रेक), स्वचालित क्रॉप रिपर, ट्रैक्टर चालित क्रॉप रिपर, ट्रैक्टर चालित लोडर तथा टेडर मशीन जैसे कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इच्छुक किसान विभाग की वेबसाइट एग्रीहरियाणाडॉटजीओवीडॉटइन पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। जिन किसानों के फार्म रिकॉर्ड में पिछले दो सीजन के दौरान फसल अवशेष जलाने के कारण रेड एंट्री दर्ज है, वे तथा उनकी फैमिली आईडी से जुड़े अन्य सदस्य इस योजना का लाभ लेने के पात्र नहीं होंगे।

सामान्य वर्ग के किसानों के लिए शर्त है कि पिछले तीन वर्षों में उनकी पीपीपी आईडी के किसी सदस्य ने इन कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ न लिया हो। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए यह शर्त लागू होगी कि जिस कृषि यंत्र के लिए आवेदन किया जा रहा है, उस पर पहले कोई अनुदान प्राप्त न किया गया हो।

उन्होंने बताया कि किसानों का “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर खरीफ व रबी 2025-26 के लिए पंजीकृत होना अनिवार्य है। प्रत्येक किसान केवल एक कृषि यंत्र के लिए ही आवेदन कर सकता है। अधिक जानकारी के लिए किसान कार्यालय सहायक कृषि अभियंता, सिरसा में किसी भी कार्य दिवस पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।

28/05/2026

सिरसा के आस-पास के कई गांवों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टी

हरियाणा में अब सिर्फ 45 दिन में लगेगा बोरवेल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेशचंडीगढ़। हरियाणा में खेतों के लिए ट्यूबवेल या घ...
28/05/2026

हरियाणा में अब सिर्फ 45 दिन में लगेगा बोरवेल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश
चंडीगढ़। हरियाणा में खेतों के लिए ट्यूबवेल या घरों-फैक्ट्रियों के लिए बोरवेल लगाने की सोच रहे लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। अब आपको बोरवेल की परमिशन (NOC) लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। हरियाणा सरकार ने जमीन से पानी निकालने (बोरवेल लगाने) की अनुमति देने की प्रक्रिया को अब सीधे 'सेवा का अधिकार अधिनियम' (Right to Service Act) के तहत शामिल कर लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब सरकारी अधिकारियों को आपकी फाइल मिलने के ठीक 45 दिन के अंदर हर हाल में बोरवेल लगाने की अनुमति देनी ही होगी।
इस नए और सख्त नियम को लेकर हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने पक्के निर्देश जारी कर दिए हैं। जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण द्वारा तय किए गए इन नियमों के तहत अब मुख्य तकनीकी अधिकारी (Chief Technical Officer) को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वह इस बात को पक्का करेंगे कि जिस भी व्यक्ति ने बोरवेल या भूजल निकालने की अनुमति मांगी है, उसे तय समय यानी 45 दिन के भीतर अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिल जाए। फाइल को बिना वजह अटकाने वाले अधिकारियों पर अब इस एक्ट के तहत सीधी कार्रवाई होगी।
कई बार लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अगर 45 दिन बीत जाने के बाद भी परमिशन न मिले तो क्या करें? इसके लिए सरकार ने आम जनता की सुनवाई का पक्का इंतजाम किया है। अगर 45 दिन में आपकी एनओसी जारी नहीं होती है, तो आप 'प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी' के तौर पर सीधे मुख्य जल विज्ञानी (Chief Hydrologist) के पास अपनी अपील लगा सकते हैं। अगर किसी कारणवश वहां भी आपकी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो 'द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी' के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आपके मामले को सुनेंगे और उसका तुरंत निपटारा करेंगे।
बोरवेल की परमिशन के लिए ऐसे करें आवेदन (पूरी प्रक्रिया):
सबसे पहले हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (HWRA) की आधिकारिक वेबसाइट या सरकार के 'सरल हरियाणा पोर्टल' (Saral Portal) पर जाएं।
अपने मोबाइल नंबर और फैमिली आईडी (PPP) के जरिए पोर्टल पर लॉग-इन करके अपना अकाउंट खोलें।
सेवाओं की सूची में भूजल निकासी/बोरवेल की एनओसी (NOC for Groundwater Extraction) का फॉर्म चुनें।
फॉर्म में अपनी जमीन की फर्द (मालिकाना हक के कागज), अपना पहचान पत्र और बोरवेल लगाने के कारण की पूरी जानकारी सही-सही भरें।
तय सरकारी फीस ऑनलाइन जमा करके फॉर्म सबमिट कर दें। इसके बाद आपको एक रसीद और ट्रैकिंग नंबर मिलेगा, जिससे आप अगले 45 दिनों तक अपनी फाइल का स्टेटस फोन पर ही चेक कर सकेंगे।

हरियाणा में अब सिर्फ 45 दिन में लगेगा बोरवेल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश
चंडीगढ़। हरियाणा में खेतों के लिए ट्यूबवेल या घरों-फैक्ट्रियों के लिए बोरवेल लगाने की सोच रहे लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। अब आपको बोरवेल की परमिशन (NOC) लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। हरियाणा सरकार ने जमीन से पानी निकालने (बोरवेल लगाने) की अनुमति देने की प्रक्रिया को अब सीधे 'सेवा का अधिकार अधिनियम' (Right to Service Act) के तहत शामिल कर लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब सरकारी अधिकारियों को आपकी फाइल मिलने के ठीक 45 दिन के अंदर हर हाल में बोरवेल लगाने की अनुमति देनी ही होगी।

इस नए और सख्त नियम को लेकर हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने पक्के निर्देश जारी कर दिए हैं। जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण द्वारा तय किए गए इन नियमों के तहत अब मुख्य तकनीकी अधिकारी (Chief Technical Officer) को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वह इस बात को पक्का करेंगे कि जिस भी व्यक्ति ने बोरवेल या भूजल निकालने की अनुमति मांगी है, उसे तय समय यानी 45 दिन के भीतर अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिल जाए। फाइल को बिना वजह अटकाने वाले अधिकारियों पर अब इस एक्ट के तहत सीधी कार्रवाई होगी।

कई बार लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अगर 45 दिन बीत जाने के बाद भी परमिशन न मिले तो क्या करें? इसके लिए सरकार ने आम जनता की सुनवाई का पक्का इंतजाम किया है। अगर 45 दिन में आपकी एनओसी जारी नहीं होती है, तो आप 'प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी' के तौर पर सीधे मुख्य जल विज्ञानी (Chief Hydrologist) के पास अपनी अपील लगा सकते हैं। अगर किसी कारणवश वहां भी आपकी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो 'द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी' के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आपके मामले को सुनेंगे और उसका तुरंत निपटारा करेंगे।

बोरवेल की परमिशन के लिए ऐसे करें आवेदन (पूरी प्रक्रिया):
सबसे पहले हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (HWRA) की आधिकारिक वेबसाइट या सरकार के 'सरल हरियाणा पोर्टल' (Saral Portal) पर जाएं।
अपने मोबाइल नंबर और फैमिली आईडी (PPP) के जरिए पोर्टल पर लॉग-इन करके अपना अकाउंट खोलें।
सेवाओं की सूची में भूजल निकासी/बोरवेल की एनओसी (NOC for Groundwater Extraction) का फॉर्म चुनें।
फॉर्म में अपनी जमीन की फर्द (मालिकाना हक के कागज), अपना पहचान पत्र और बोरवेल लगाने के कारण की पूरी जानकारी सही-सही भरें।
तय सरकारी फीस ऑनलाइन जमा करके फॉर्म सबमिट कर दें। इसके बाद आपको एक रसीद और ट्रैकिंग नंबर मिलेगा, जिससे आप अगले 45 दिनों तक अपनी फाइल का स्टेटस फोन पर ही चेक कर सकेंगे।

हरियाणा में इन 8 फसलों की खेती करने वाले किसानों को 8000 रुपये और 2000 रुपये बोनस अलग से देगी हरियाणा सरकारी हरियाणा सरक...
27/05/2026

हरियाणा में इन 8 फसलों की खेती करने वाले किसानों को 8000 रुपये और 2000 रुपये बोनस अलग से देगी हरियाणा सरकारी

हरियाणा सरकार द्वारा खरीफ-2026 के दौरान धान के रकबे को कम करने तथा गिरते भू-जल स्तर को बचाने के उद्देश्य से मेरा पानी-मेरी विरासत योजना लागू की गई है। योजना के तहत धान की फसल के स्थान पर वैकल्पिक फसलें अपनाने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि जो किसान धान की जगह मक्का, कपास, खरीफ दलहन, तिलहन, चारा फसलें, सब्जियां, कृषि वानिकी अपनाएंगे या खेत खाली रखेंगे, उन्हें भी योजना का लाभ मिलेगा। इसके अलावा दालें, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को 2 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस राशि भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इच्छुक किसान मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल http://fasal.haryana.gov.in/ पर अपना पंजीकरण करवाएं। यह पोर्टल अंतिम तिथि तक खुला रहेगा। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने खरीफ-2025 में फसल विविधीकरण के तहत मेरा पानी-मेरी विरासत योजना का लाभ लिया था और वे खरीफ-2026 में भी फसल विविधीकरण अपनाते हैं, वे इस योजना के तहत पुन: लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार वैकल्पिक फसलों की बुआई करने तथा मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत पंजीकरण करवाने के बाद ही किसानों को सत्यापन उपरांत 8 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित उप मंडल कृषि अधिकारी अथवा खंड कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में योजना के तहत पंजीकरण करवाकर लाभ उठाने की अपील की।

29 मई को किसानों का  #खुईयां टोल प्लाजा पर बड़ा प्रदर्शन, 4 घंटे नहीं लगेगा टॉलसिरसा। संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक ...
27/05/2026

29 मई को किसानों का #खुईयां टोल प्लाजा पर बड़ा प्रदर्शन, 4 घंटे नहीं लगेगा टॉल
सिरसा। संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक (भारत) के आह्वान पर किसानों-मजदूरों की मांगों को लेकर पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान में टोल प्लाजा को पर्ची मुक्त किया जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय किसान एकता (बीकेई) द्वारा किसानों मजदूरों के सहयोग से शुक्रवार, 29 मई 2026 को खुईयां टोल प्लाजा (डबवाली) को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक पर्ची मुक्त किया जाएगा। भारतीय किसान एकता (बीकेई) के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान आंदोलन भाग-1 एवं भाग-2 की शेष मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगातार अनदेखी की जा रही है। किसानों पर थोपे जा रहे कर-मुक्त व्यापार समझौते, बिजली बिल 2025, सीड्स बिल 2025 तथा खेती-किसानी विरोधी नीतियों के खिलाफ किसानों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि किसानों की स्थानीय समस्याएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। खरीफ 2020 का डबवाली, कालांवाली तथा गोरीवाला तहसीलों का बकाया मुआवजा आज तक जारी नहीं किया गया है। रोड़ी, कालांवाली, ओढ़ां एवं डबवाली क्षेत्र के किसानों के खेतों तक सिंचाई पानी पहुंचाने के लिए घग्गर नदी से फलड़ी नाला निकालने की मांग लंबे समय से लंबित पड़ी है। नहरी पानी की सप्लाई भी पूरी तरह बाधित है, जिससे किसान परेशान हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार, गेहूं की बकाया पेमेंट जारी करने तथा किसानों- मजदूरों की अन्य लंबित मांगों को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है। इसी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भारतीय किसान एकता (इङए) की टीम द्वारा गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार, 27 मई को संगठन की टीम से बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, मीडिया प्रभारी गुरलाल सिंह भंगू, गुरजीत सिंह मान, राजू फूलकां, कंता सिंह भंगू ने घुक्कांवाली, नुईयांवाली तथा सालमखेड़ा सहित कई गांवों में पहुंचकर किसानों को खुईया टोल प्लाजा आंदोलन में शामिल होने का न्योता दिया। औलख ने किसानों, मजदूरों, व्यापारियों तथा आमजन से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस संघर्ष को मजबूत करें, ताकि किसानों की आवाज सरकार तक मजबूती से पहुंच सके।उन्होंने बताया कि टोल प्लाजा पर आने वाले किसानों एवं आमजन के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और गांवों द्वारा सेवा का प्रबंध भी किया गया है। गुरुद्वारा श्री चोरमार साहिब की ओर से लंगर सेवा, गांव नीलांवाली के ग्रामीणों द्वारा ठंडे पानी की सेवा, सिंधु मोटर्स डबवाली द्वारा बिस्कुट सेवा तथा अलग-अलग गांवों से दूध की सेवा पहुंचाई जाएगी।

29 मई को किसानों का खुईयां टोल प्लाजा पर बड़ा प्रदर्शन, 4 घंटे नहीं लगेगा टॉल
सिरसा। संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक (भारत) के आह्वान पर किसानों-मजदूरों की मांगों को लेकर पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान में टोल प्लाजा को पर्ची मुक्त किया जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय किसान एकता (बीकेई) द्वारा किसानों मजदूरों के सहयोग से शुक्रवार, 29 मई 2026 को खुईयां टोल प्लाजा (डबवाली) को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक पर्ची मुक्त किया जाएगा। भारतीय किसान एकता (बीकेई) के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान आंदोलन भाग-1 एवं भाग-2 की शेष मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगातार अनदेखी की जा रही है। किसानों पर थोपे जा रहे कर-मुक्त व्यापार समझौते, बिजली बिल 2025, सीड्स बिल 2025 तथा खेती-किसानी विरोधी नीतियों के खिलाफ किसानों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि किसानों की स्थानीय समस्याएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। खरीफ 2020 का डबवाली, कालांवाली तथा गोरीवाला तहसीलों का बकाया मुआवजा आज तक जारी नहीं किया गया है। रोड़ी, कालांवाली, ओढ़ां एवं डबवाली क्षेत्र के किसानों के खेतों तक सिंचाई पानी पहुंचाने के लिए घग्गर नदी से फलड़ी नाला निकालने की मांग लंबे समय से लंबित पड़ी है। नहरी पानी की सप्लाई भी पूरी तरह बाधित है, जिससे किसान परेशान हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार, गेहूं की बकाया पेमेंट जारी करने तथा किसानों- मजदूरों की अन्य लंबित मांगों को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है। इसी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भारतीय किसान एकता (इङए) की टीम द्वारा गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार, 27 मई को संगठन की टीम से बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, मीडिया प्रभारी गुरलाल सिंह भंगू, गुरजीत सिंह मान, राजू फूलकां, कंता सिंह भंगू ने घुक्कांवाली, नुईयांवाली तथा सालमखेड़ा सहित कई गांवों में पहुंचकर किसानों को खुईया टोल प्लाजा आंदोलन में शामिल होने का न्योता दिया। औलख ने किसानों, मजदूरों, व्यापारियों तथा आमजन से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस संघर्ष को मजबूत करें, ताकि किसानों की आवाज सरकार तक मजबूती से पहुंच सके।उन्होंने बताया कि टोल प्लाजा पर आने वाले किसानों एवं आमजन के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और गांवों द्वारा सेवा का प्रबंध भी किया गया है। गुरुद्वारा श्री चोरमार साहिब की ओर से लंगर सेवा, गांव नीलांवाली के ग्रामीणों द्वारा ठंडे पानी की सेवा, सिंधु मोटर्स डबवाली द्वारा बिस्कुट सेवा तथा अलग-अलग गांवों से दूध की सेवा पहुंचाई जाएगी।

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