22/06/2025
#जापानी_शोधकर्ताओं ने वास्तव में पाया है कि मनुष्य #जैवसंदीप्तता ( #बायोल्यूमिनेसेंस) नामक प्रक्रिया के माध्यम से एक मंद, #दृश्यमान_प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, जिसकी #अधिकतम_तीव्रता_शाम_4_बजे_के_आसपास होती है।
यह प्रकाश, जो #मानव_आँख द्वारा देखे जा सकने वाले प्रकाश से 1000 गुना कमज़ोर है, #चयापचय_प्रतिक्रियाओं का एक उपोत्पाद है और 24 घंटे की लय प्रदर्शित करता है, जो #सर्कैडियन_जीव_विज्ञान और #चिकित्सा_अनुप्रयोगों_में_संभावित अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
यहाँ अधिक विस्तृत जानकारी दी गई है:
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#मनुष्यों_में_जैवप्रकाशिकी:
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यद्यपि मानव शरीर द्वारा उत्सर्जित मंद प्रकाश नग्न आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन यह #बायोल्यूमिनेसेंस का एक रूप है, जो एक ऐसी घटना है जिसमें जीवित जीव प्रकाश उत्पन्न करते हैं और उत्सर्जित करते हैं।
#अति_कमजोर_फोटॉन_उत्सर्जन ( #यूपीई):
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इस मंद प्रकाश को अति-क्षीण फोटॉन उत्सर्जन (UPE) के नाम से भी जाना जाता है और यह शरीर के भीतर चयापचय प्रतिक्रियाओं का उपोत्पाद है।
ंटे_की_लय:
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इस प्रकाश उत्सर्जन की तीव्रता पूरे दिन बदलती रहती है, जो शाम 4 बजे के आसपास चरम पर होती है, जो शरीर की #सर्कडियन_लय_से_संबंध का संकेत देती है।
#संभावित_चिकित्सा_अनुप्रयोग:
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इस खोज से मानव स्वास्थ्य की निगरानी के लिए नए गैर-आक्रामक तरीकों की खोज हो सकती है, क्योंकि उत्सर्जित प्रकाश #चयापचय_गतिविधि और #संभावित_चिकित्सा_स्थितियों से जुड़ा हुआ है।
#केवल_मनुष्यों_तक_सीमित_नहीं:
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यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बायोलुमिनेसेंस केवल मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है; कई अन्य जीवित प्राणी भी इस घटना को प्रदर्शित करते हैं।