A social activist works to eradicate poverty

A social activist works to eradicate poverty Ideas to create sustainable livelihood
which generate employment in large scale .

28/04/2021

अपने देश में ईमानदारी का कोई महत्व नहीं है। मुफ्त में मिलती है न!

बेईमान लोगों को भी ईमानदारी बुरी नहीं लगती, लेकिन उतनी अच्छी भी नहीं लगती कि उसे अपना लें।

बेईमानी और ईमानदारी के बीच वही रिश्ता होता है जो शेर और शिकार के बीच होता है। बेईमानी हमेशा ईमानदारी पर टूट पड़ने को तैयार रहती है। वैसे तो छोटे बेईमान को भी बड़ा बेईमान मार कर खा जाता है। लेकिन बड़े बेईमान से हार जाने के कारण छोटा बेईमान ईमानदार नहीं हो जाता।

ईमानदारी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा होता है दूसरा ईमानदार। दो ईमानदार कभी साथ मिलकर काम नहीं कर सकते।

दो ईमानदारों की मंजिल एक हो सकती है, लेकिन उनका रास्ता कभी एक नहीं होता। इसलिए ईमानदारी कभी ऐसी पगडण्डी नहीं बना पाती जिस पर दूसरे लोग भी चलें। दूसरी ओर बेईमानी राजमार्ग बनाती चली जाती है।

अगर ईमानदारी ऐसा कोई रास्ता बना भी ले जिस पर चला जा सकता हो, तो भी बाद में उस राह पर चलनेवाले को भी उतनी ही तकलीफ होती है जितनी पहले चलने वालों को हुई थी।

ईमानदारी बहुत डरावनी चीज होती है। बेईमान उससे बहुत डरते हैं। ईमानदार के घरवाले भी डरते हैं, क्योंकि उनके घर में जितनी भी परेशानियाँ होती हैं इसी के कारण होती हैं।

रास्ता चलते किसी ने पूछा - ‘तुम कौन हो?’

‘मैं ईमानदारी हूँ।’

‘तुम ईमानदारी क्यों हो?’

‘यह तो आज तक मेरी भी समझ में नहीं आया।’

जैसे ही बच्चे को भले-बुरे में फर्क करने की समझ आ जाती है, बेईमान आदमी बच्चे को ईमानदारी का चित्र बनाकर दिखाता है - ‘इसे ठीक से पहचान ले। यह ईमानदारी है। इससे सदा दूर ही रहना। अगर ईमानदारी सामने से आती दिखाई दे तो तुम रास्ता बदल लेना। उसे अपना रास्ता कभी काटने मत देना। अगर जिन्दगी में कामयाब होना है तो यह नसीहत हमेशा याद रखना।’

बेईमान माँ-बाप की औलाद ईमानदार भी हो सकती है। ईमानदार होकर वह अपने माँ-बाप का कोई अपमान नहीं करती।

ईमानदार कभी बेवकूफ नहीं होता। बेईमान कभी बुद्धिमान नहीं होता। वह चालाक हो सकता है। चालाकी कभी बुद्धिमानी नहीं हुआ करती।

बेईमानी बरदाश्त करना अलग बात है, खुद बेईमान होना अलग।

ईमानदारी में ड्रामा नहीं होता, लेकिन उसमें हिम्मत बहुत होती है। ईमानदारी में बस एक कमजोरी होती है। वह चाहती है कि बेईमानी के साथ भी इंसाफ हो। और ईमानदारी की इस कमजोरी का फायदा बेईमानी हमेशा उठाती है।

ईमानदारी सुविधा नहीं, चरित्र है। अगर वह इंसाफ न करे तो ईमानदारी, ईमानदारी नहीं रहती।

ईमानदार आदमी जानता है कि उसे ईमानदार बनाकर ईश्वर ने कोई गलती नहीं की। बेईमान आदमी तो ऐसा कभी सोच भी नहीं सकता।

अपने ईमानदार होने का दोष ईमानदार आदमी कभी दूसरे को नहीं देता। बेईमानों के लिए तो सब गलतियाँ दूसरों की ही होती हैं।

इस दुनिया में बेईमानी कितनी ही बढ़ जाये लेकिन ईमानदारी कभी खत्म नहीं होगी। क्योंकि एक बेईमान भी दूसरे से ईमानदारी की ही उम्मीद करता है।

बेईमान भी ईमानदार बन जाता है, अगर काम ईमानदारी से ही बनने वाला हो तो।

लोग समझते हैं कि बेईमानों के पास ईमान नहीं होता। बहुत होता है! इतना होता है कि दिन-रात बेचते हैं, फिर भी खत्म नहीं होता।

ईमानदार आदमी को यह कहने में कभी शर्म नहीं आती कि वह ईमानदार है। बेईमान को यह कहने में बहुत शर्म आती है कि वह बेईमान है। सच बात तो यह है कि वह कभी ऐसा कहता भी नहीं। कहे तो तब न जब वह यह माने कि वह बेईमान है।

बेईमान आदमी भी अपने आप को ईमानदार ही कहता है। यह ईमानदारी की सबसे बड़ी ताकत है।

#बांकी_आप_लोग_तो_ईमानदार_हैं_ही....

Activities to eradicate poverty
26/03/2021

Activities to eradicate poverty

02/01/2021

कैसे पता लगे कि, कुंडलिनी जागृत हो चुकी है ?

यदि निम्न लक्षण आपको दिखाई दे तो आप समझ सकते हैं कि मां आदिशक्ति क्रिया कर रही है या उसकी क्रिया का विस्तार हो रहा है–

1. यदि साधना करते हुए कुछ देर साधना में बैठने के बाद आपको बहुत तेज पेशाब की शिकायत होती है और ऐसा बार-बार होता है तो, यह लक्षण है कि , आपकी ऊर्जा क्रियाशील हो गई है, अब वह मूल आधार एवं स्वाधिष्ठान को शक्तिशाली बनाने का प्रयास कर रही है ।

2. यदि ध्यान करते हुए आपकी रीढ़ की हड्डी गर्म महसूस होती है तो समझ लीजिए ऊर्जा जागृत हो चुकी है और ऊर्जा उधर्व गमन कर रही है।

3.यदि आसन में बैठे हुए मूलाधार चक्र में आपको चिंटिंया चलने जैसा अनुभव होता है तो समझ लीजिए कि, ऊर्जा क्रियाशील हो रही है ।

4. यदि ध्यान में बैठे हुए अपने आप आपके शरीर में झटके लगने लगते हैं तो, समझ लीजिए ऊर्जा क्रियाशील हो गई है।

5. यदि ध्यान में बैठे हुए, अपने आप आपकी स्वास अत्यंत गहरी एवं धीमी हो गई है और उसके प्रभाव से आपको जहां पर ध्यान लगा रहे हैं, वहां पर प्रकाश का साक्षात्कार हो रहा है तो समझ लीजिए उर्जा जागृत हो रही है।
6. आप यदि किसी भी चक्र पर ध्यान लगाते हैं और उस चक्र में आपको प्रकाश दिखाई देने लगता है तो निश्चित मान कर चलिए आपकी ऊर्जा सक्रिय हो चुकी है।

7. ध्यान करते हुए यदि आपकी गर्दन में झटके लगते हैं तो समझ लीजिए ऊर्जा कंठ चक्र अर्थात विशुद्धि चक्र तक आ चुकी है।

8.आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाते हुए यदि आपको आज्ञा चक्र पर प्रकाश का साक्षात्कार होता है और मशीन से ड्रिल करने जैसा अनुभव होता है । ऐसा लगता है जैसे कि आज्ञा चक्र स्थान पर ड्रिल करके प्रकाश को आरपार निकाला जा रहा है तो मान कर चलिए आपकी ऊर्जा आज्ञा चक्र तक आ चुकी है।

9. यदि आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाने का प्रयास करने पर भी ध्यान ललाट मध्य जाकर स्थिर होता है तो समझ लीजिए उर्जा आज्ञा चक्र से ऊपर उठ रही है।

10. यदि ध्यान करते हुए आपको असीम आनंद की अनुभूति होने लगी है तो समझ लीजिए आपकी ऊर्जा आज्ञा चक्र को पार करके सहस्रार चक्र तक पहुंचने लगी है।

11. यदि आपका ध्यान ललाट के सबसे ऊपरी भाग पर पूर्ण स्थिरता से लगने लगा है और वहां पर आपको पूर्ण प्रकाश का साक्षात्कार होने लगा है।असीम आनंद की अनुभूति होने लगी है ।मस्तिष्क मध्य श्वेत शीतल प्रकाश के साथ अमृत के स्राव का अहसास होने लगा है तो समझ लीजिए आपकी ऊर्जा सहस्रार चक्र का विस्तार करने लगी है और शरीर स्थित समस्त देवताओं के द्वारा अमृत पान होने लगा है।

12. यदि आपको अपने मस्तिष्क के अंदर अपने आप कोई ध्वनि सुनाई देने लगी है तो आप मान लीजिए कि नाद जागरण हो रहा है और इसका अर्थ है ऊर्जा आज्ञा चक्र से ऊपर आ चुकी है ।

13.यदि आपने मूलाधार चक्र पर ध्यान किया और कंपन सहस्रार चक्र पर महसूस होते हैं ।जिस प्रकार से फंवारा चलता है ,वैसा अनुभव होता है। श्वेत शीतल प्रकाश सहस्रार चक्र में निकलता हुआ दिखाई देता है तो समझ लीजिए आपकी कुंडलिनी ऊर्जा का प्रवाह मूलाधार से सहस्रार चक्र तक सुचारू रूप से होने लगा है। बस इन लक्षणों से आप अपने आप का मूल्यांकन कीजिए ।संपूर्ण सत्य आपको समझ में आने लगेगा।
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Observe minutely to conquer poverty
07/08/2020

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Ways to eradicate poverty
10/07/2020

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Madhubani ki janta aapki aabhari rahegi
18/02/2020

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Watch changing india
27/01/2020

Watch changing india

15/01/2020

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माघमासे_गमिष्यन्ति_गंगायमुनसंगमे।
#ब्रह्माविष्णु_महादेवरुद्रादित्यमरुदगणा:॥
अर्थात् :- ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, रुद्र, आदित्य तथा मरुद्गण माघ मास में प्रयागराज के लिए यमुना के संगम पर गमन करते हैं।
उत्तरायण का सूर्य आपके स्वप्नों को नयी ऊष्मा प्रदान करे, आपके यश एवम् कीर्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हो, आप परिजनों सहित स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों, ऐसी कामना है । मकर संक्रान्ति के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं..।

12/01/2020
25/08/2019

सभी किसान भाइयों को नमस्कार,

आज मैं आप सबसे खेती-किसानी, उसकी समस्याओं, उनके कारण और निवारण पर बात करूंगा

- खेती में कम आमदनी
- मिट्टी की घटती उर्वरता
- खेती की घटती उत्पादकता
- उपज की घटती मात्रा व गुणवत्ता
- नष्ट होने की कगार पर आ चुकी मृदा जैव विविधता
- विकृत हो चुकी प्राकृतिक मृदा उर्वरता व्यवस्था

खेती की प्रमुख समस्याएं हैं.

- हमारी मिट्टी की उर्वरता क्यों घट रही है ?
- हमारी उपज क्यों घट रही है ?
- हमारी उपज की गुणवत्ता और पोषकता क्यों घट रही है ?

इसके अनेकानेक कारण हैं.

इनमें से कुछ कारण जो मुझे समझ प़डते हैं,
वे हैं :-
- खेतों में गोबर तथा कंपोस्ट का कम प्रयोग ।
- हरी खाद का कम प्रयोग
- कृत्रिम उर्वरकों का अति प्रयोग और उनके प्रयोग पर निर्भरता ।
तथा
- विषयुक्त फसल सुरक्षा रसायनों का अति प्रयोग ।

इससे
- हमारे खेत की मिट्टी का ह्यूमस स्तर व कार्बन स्तर खराब हो गया है।
- मिट्टी में पाए जाने वाले लाभप्रद सूक्ष्म जीवाणु कम हो गए हैं
- मृदा जैव विविधता समाप्त हो रही है।
- मिट्टी की स्वपोषी उर्वरता प्रणाली नष्ट हो गई है।
- पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है ।
- मिट्टी और भूगर्भ जल दूषित हो रहा है।
- विषैले अपशिष्ट (टॉक्सिक रेसिड्यूज-TOXIC RESIDUES)
- हमारी खाद्य प्रणाली (फूड चैन) में आ रहे हैं,
- जिसका हमारे स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ रहा है

भविष्य में इसके और भी गंभीर दुष्परिणाम संभावित हैं।

किसान भाइयों,

हम आत्मनिर्भर व अतिरिक्त खाद्यान्न उत्पादक देश जरूर हैं, लेकिन हमारी उपज की गुणवत्ता और पोषकता अंतरराष्ट्रीय मानदंडों पर पिछड़ रही है। हम अपनी अतिरिक्त उपज को निर्यात कर आमदनी ले पाने में विफल हो रहे हैं।

यदि हम उपजवृद्धि के साथ-साथ अपनी उपज की गुणवत्ता और पोषकता को ठीक कर लें, तो “ग्लोबल फूड और न्यूट्रीशन सिक्यूरिटी “ को नियंत्रण में करने की क्षमता हमारे देश के किसानों में हैI इससे हम कृषि क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपना वर्चस्व कायम कर सकते हैं और अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं I

ऐसे में इन समस्याओं के निवारण के लिए क्या किया जाये ?
इस पर हमें विचार करना होगा।

मेरा मानना है कि
चरणबद्ध तरीके से यदि हम अपने खेत की मिट्टी की उर्वरता और उसकी उत्पादकता तथा उपज की गुणवत्ता और उसकी पोषकता को ठीक कर लें तो खेती से हमारी आमदनी बढ़ाने का रास्ता निकल आएगा।

हमारी गुणवत्तापूर्ण उपज का अधिक मूल्य मिल सकेगा, और हम अतिरिक्त उपज का निर्यात कर आय वृद्धि कर सकेंगे ।

हमें अपनी कृषि उपज की मात्रा के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता कैसे बढ़ाई जाये - इस पर ध्यान देना होगा।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि-
मृदा उर्वरता और उपज की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक "ह्यूमस" है।

मेरा मानना है कि
हम अपने खेत का ह्यूमस स्तर सुधार कर मिट्टी की उर्वरता, उसकी उत्पादकता, उपज की गुणवत्ता और पोषकता को बढ़ा सकते हैं।

अब खेत की मिट्टी का ह्यूमस स्तर कैसे ठीक किया जाये ?
इसका उपाय करने की जरूरत है ।

इसके उपाय स्वरूप मेरी टीम ने वर्षों के अथक प्रयास और रिसर्च के बाद कुछ विशिष्ट ऑर्गेनिक उत्पाद (विशेष ऑर्गेनिक प्रोडक्ट) तैयार किये हैं।

यह उत्पाद "भूमिशोधक", "मृदापोषक" एवं "उपजवर्धक" इत्यादि नामों से आपके बीच आ रहे हैं।

आप इनका प्रयोग करके
अपने खेत की मिट्टी का स्वास्थ्य,
ह्यूमस स्तर
और उत्पादकता बढा सकते हैं।

उपज की मात्रा तथा गुणवत्ता बढाकर, खेती से ज्यादा आमदनी ले सकते हैं ।

किसान भाइयों,
हरित क्रांति ने हमें खाद्यान्न सुरक्षित बनाया
लेकिन अब हमें खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ Agricultural Sustainability,
गुणवत्तापूर्ण उपजवृद्धि,
किसान भाइयों की आमदनी में वृद्धि,
उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और पोषकता की सुरक्षा, तथा
पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय जैविक क्रांति की आवश्यकता है

मैं, आप सभी किसान भाइयों और सभी देशवासियों का राष्ट्रीय जैविक क्रांति में आह्वान करता हूं

"हरे खेत - भरे खलिहान
स्वस्थ भारत - समृद्ध किसान"

का हमारा स्वप्न साकार करने,
"खेती से आमदनी बढ़ाने"
एवं
हमारे देश की "पोषकीय खाद्य एवं स्वास्थ्य सुरक्षा" (Nutritive Food & Health Security)
तथा
"पर्यावरण संरक्षण"
को सुनिश्चित करने की हमारी इस मुहिम में,
मैं आप सभी किसान भाइयों सहित सभी देशवासियों से सहभागिता की अपील करता हूं -

राष्ट्रीय जैविक क्रांति के माध्यम से हम
मिट्टी की उर्वरता
खेती की उत्पादकता
उपज की मात्रा व गुणवत्ता
किसान भाइयों की आमदनी
उपभोक्ता के स्वास्थ्य की सुरक्षा
तथा
खेती की संपोषणीय निरंतरता (Agricultural Sustainability)
को सुनिश्चित करेंगे.

कृषि एवं उर्वरक व्यवसाय से जुड़े व्यापारी बंधुओं और ग्रामीण बेरोजगार युवा भाइयों से मेरी अपील है कि आप व्यवसाय व स्वरोजगार सृजन के लिए आगे आएं और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में किसान भाइयों तक उपजवर्धक उत्पादों को पहुंचाने में सहयोग करें I

किसान भाइयों,
साइल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) और सॉइल हेल्थ (Soil Health) को ठीक करने का विकल्प –
अब दोनों आपके पास हैं.

भूमिशोधक का प्रयोग कीजिए - आपके खेत की मिट्टी का कायाकल्प सुनिश्चित है.

उपजवर्धक का प्रयोग कीजिए - भरपूर पैदावार सुनिश्चित है.

उपजवर्धक देता है - भरपूर उपज का वादा
रासायनिक खाद कम - और उत्पादन ज्यादा

राष्ट्रीय जैविक क्रांति
NATIONAL ORGANIC REVOLUTION
मतलब
खाद्यान्न सुरक्षा के साथ साथ पोषण और स्वास्थ्य की सुरक्षा

- Mahendra Singh Dhoni

Dabholkar method will reduce cost of cultivation and enhance prosperity
24/08/2019

Dabholkar method will reduce cost of cultivation and enhance prosperity

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Madhubani

Telephone

+919939267181

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